उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की हालिया परीक्षा में पेपर लीक की आशंका ने एक बार फिर भर्ती व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर तीन पन्नों का पेपर वायरल होने के बाद बेरोज़गार संघ ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और CBI जांच की मांग की।
सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच शुरू कराई और कार्रवाई में तेजी दिखाई। विशेष टास्क फोर्स और देहरादून पुलिस ने दो आरोपियों – हकम सिंह और पंकज गौड़ – को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों ने उम्मीदवारों को लीक प्रश्नपत्र दिलाने का लालच देकर लाखों रुपए की मांग की थी। चौंकाने वाली बात यह है कि हकम सिंह 2021 के पेपर लीक मामले में भी पकड़ा जा चुका है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ कहा है कि “राज्य की भर्ती प्रणाली से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा।” उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को ‘चीटिंग माफिया’ की करतूत बताते हुए सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है, जो वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में काम कर रही है। आयोग अध्यक्ष जी.एस. मर्तोलिया ने बयान जारी कर कहा कि शुरुआती जांच में वायरल पन्नों को पढ़ने योग्य नहीं पाया गया और परीक्षा केंद्रों पर जैमर भी लगाए गए थे।
कड़ा कानून लागू
सरकार ने पिछले साल ही उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम, 2023 लागू किया था, जिसमें पेपर लीक और परीक्षा धोखाधड़ी को रोकने के लिए बेहद सख्त सज़ा का प्रावधान है। इस अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास और करोड़ों रुपए तक जुर्माना भी लगाया जा सकता है। यहां तक कि व्यक्तिगत स्तर पर नकल करते पकड़े जाने पर भी न्यूनतम तीन साल की जेल और पाँच लाख रुपए का जुर्माना तय है।
बेरोजगारों का गुस्सा
इधर, उत्तराखंड बेरोज़गार संघ ने आरोप लगाया कि पेपर 11:35 बजे वायरल हुआ था और इसे मीडिया के सामने भी दिखाया गया। संघ ने 22 सितंबर को देहरादून के परेड ग्राउंड से सचिवालय कूच का ऐलान किया है।







