उत्तरकाशी की धराली घाटी में आई तबाही से पहले अगर कोई अलार्म बजा था, तो वो वैज्ञानिकों ने ही बजाया था। इसरो (ISRO) के वैज्ञानिकों ने एक साल पहले ही एक रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें साफ कहा गया था कि अगर 4,000 मीटर से ऊपर भारी बारिश हुई तो धराली जैसे इलाके जल प्रलय की चपेट में आ सकते हैं।
लेकिन अफ़सोस, ये रिपोर्ट उत्तराखंड आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) को भेजे जाने के बावजूद न सिर्फ अनदेखी हुई, बल्कि फाइलों में कहीं ‘गुम’ हो गई। आज हालात सबके सामने हैं-बस्तियाँ मलबे में तब्दील हो गईं, लोगों के घर उजड़ गए, और कई ज़िंदगियाँ मौत की आगोश में समा गईं।
ISRO के वैज्ञानिकों ने “Assessment of Glacial Lakes and Water Bodies in Ganga Basin” नाम की यह रिपोर्ट 2023 में तैयार की थी। इसमें धराली क्षेत्र में बहने वाली उप-नदियों के किनारे जल जमाव और संभावित बाढ़ को लेकर चेतावनी दी गई थी। रिपोर्ट में 22 से अधिक ऐसे जलाशयों की पहचान की गई थी जो भारी बारिश के बाद फट सकते हैं।
प्रशासन ने क्या किया?
जब अमर उजाला ने इस मुद्दे पर पुनर्वास सचिव डॉ. नीरज खैरवाल से सवाल किया, तो उन्होंने कहा, “हम पता करवा रहे हैं कि ये रिपोर्ट हमें क्यों नहीं मिली।” यानी प्रशासन अब ये जानने में लगा है कि वो चेतावनी कहाँ गायब हो गई, जबकि ज़मीन पर लोग तबाह हो चुके हैं।
क्या बचाया जा सकता था?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रिपोर्ट पर अमल किया जाता, तो हाई-रिस्क ज़ोन को खाली कराया जा सकता था, जल निकासी के उपाय किए जा सकते थे और इस त्रासदी को कम से कम किया जा सकता था।







