उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बुज़ुर्गों को दीनदयाल मातृ-पितृ योजना के अंतर्गत फ्री में तीर्थ यात्राएँ करवाई जायेंगी। मॉनसून खत्म होने के बाद सभी बुज़ुर्ग यात्रा के लिए पर्यटन विभाग द्वारा लेजाए जायेंगे। यह निर्णय दून पर्यटन विभाग ने सभी बुज़ुर्गों की सुरक्षा के चलते लिया है। आपको बता दें कि दीनदयाल मातृ-पितृ योजना के अंतर्गत अभी तक दून जनपद से कुल 40 वृद्ध लोगों ने आवेदन कर लिया है। उनके सभी काग़ज़-पत्रों की जाँच-पड़ताल जारी है। जैसे ही जाँच हो जाती है उसके बाद पर्यटन विभाग यात्रा के लिए संसाधनों को इंतज़ाम करेगा।

नीचे इस योजना की पूरी जानकारी है:
सन् 2017 में बीजेपी सरकार ने पूर्व कांग्रेस सरकार द्वारा चलाई गई “मेरे बुजुर्ग मेरे तीर्थ” योजना का नाम बदल कर “दीनदयाल मातृ-पितृ तीर्थाटन योजना” कर दी थी। इस योजना के अंतर्गत उत्तराखंड के बुज़ुर्गों को चारों धाम समेत बाकी के धार्मिक स्थलों की मुफ्त में यात्रा कराई जाती है। पूर्व कांग्रेस सरकार द्वारा इस योजना के चलते सिर्फ गंगोत्री, बद्रीनाथ, नानकमता, और रीठा साहिब की ही यात्रा कराई गई थी। वहीं जबसे भाजपा सरकार का शासनकाल शुरू हुआ, तब से यात्रा की संख्या 4 से बड़कर 13 कर दी गई है। भाजपा सरकार ने 2018 में इसमें ताड़केश्वर, कलियर शरीफ, कालिमठ, जागेश्वर, गैराड गोलू, गंगोलीहाट, महासू देवता, कालिंका, और ज्वाल्पा को भी शामिल कर दिया है। इस योजना में केवल 60 वर्ष से अधिक वर्ष के बुजुर्ग राज्य के अंदर किसी भी तीर्थ में जाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

आपको बता दें कि पर्यटन विभाग बुज़ुर्गों की सभी ज़रूरतों का भली-भाँति ख्याल रखते हैं। खाने से लेकर ठहरने तक की व्यवस्था उनके द्वारा की जाती है। इसके साथ ही जो अधिक बुजुर्ग होते हैं उनके लिए यात्रा के दौरान एक सहायक ज़रूर रहता है। यात्रा करने हेतु बुर्जुगों को पहले आवेदन कर अपने प्रमाण पत्रों को जमा करवाना होता है जिसके बाद जाँच की जाती है।
जानकारी के अनुसार इस वर्ष सबसे अधिक आवेदन जागेश्वर और रीठा साहेब के लिए किये गए हैं। 25 आवेदन जागेश्वर और 15 रीठा साहेब के हैं। पर्यटन विभाग दावा कर रहा है कि अभी और भी आवेदन आने की गुंजाइश है। आपको बता दें कि वभाग ने परिवहन विभाग से परिवहन की व्यवस्था की जाएगी और बुजुर्गों के रहने खाने की व्यवस्था GMVN यानि गढ़वाल मंडल विकास निगम के गेस्ट हाउस में किया जाएगा। इस यात्रा को सफलता पूवर्क खत्म करने के लिए पर्यटन विभाग ने सरकार से 5 लाख रूपए की मांग भी रख दी है। साथ ही दावा कर रहे हैं कि जल्द से जल्द उनको बजट मिल जाएगा और यात्रा शुरू कर दी जायेगी।







