उत्तराखंड के उत्तरकाशी ज़िले में मंगलवार को हुई बादल फटने की घटना ने पूरे इलाके में हाहाकार मचा दिया। धराली गांव और उसके आसपास के क्षेत्रों में तेज़ बारिश के बाद खीर गंगा नदी उफान पर आ गई, जिससे अचानक आई बाढ़ और मलबे की धार ने घर, होटल, दुकानें और सड़कें बहा दीं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, बारिश के बाद पानी का बहाव इतना तेज़ था कि कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका पानी और मलबे से भर गया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में एक कार को तेज़ धारा अपने साथ बहा ले जाती दिख रही है, जिसमें लोग सवार थे। यह दृश्य देखने वालों का दिल दहला देने वाला था।
जान-माल का नुकसान
अभी तक प्रशासन ने चार लोगों की मौत की पुष्टि की है, जबकि 50 से अधिक लोग लापता हैं। कई लोग मलबे में दबे होने की आशंका है। 20 से ज्यादा होटल और होमस्टे पूरी तरह बह गए हैं, वहीं गंगोत्री धाम जाने वाला मार्ग भी बंद कर दिया गया है।
बचाव कार्य तेज़
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर शोक जताते हुए कहा कि राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी और सेना की टीमें मौके पर तैनात हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने भी हालात की समीक्षा की और अतिरिक्त बचाव दल भेजने के निर्देश दिए।
चेतावनी और हेल्पलाइन
आईएमडी ने उत्तरकाशी सहित आसपास के जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है और लोगों को नदियों से दूर रहने की सलाह दी है। प्रशासन ने सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं – 01374-222126, 01374-222722 और 9456556431।
यह हादसा एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन और अनियंत्रित निर्माण कार्य के खतरों को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे क्षेत्रों में सतर्कता और सुरक्षित विकास ही भविष्य में आपदाओं के असर को कम कर सकता है।







