आज उत्तराखंड में सावन का आख़िरी सोमवार है। पहाड़ से लेकर मैदान तक शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ी है, लेकिन इस बार माहौल में भक्ति के साथ-साथ संवेदना भी जुड़ी हुई है। हाल के दिनों में उत्तरकाशी के धराली और आसपास के क्षेत्रों में बादल फटने और भूस्खलन से कई घर उजड़ गए, लोग बेघर हुए और कुछ अब भी लापता हैं।
गंगोत्री धाम की ओर जाने वाले रास्तों पर कई जगह क्षति हुई है, लेकिन इसके बावजूद भक्त गंगाजल लेकर शिवलिंग पर जलाभिषेक कर रहे हैं। मंदिरों में न केवल आस्था का प्रवाह है, बल्कि आपदा पीड़ितों के लिए सामूहिक प्रार्थनाएं भी हो रही हैं।
हरिद्वार, ऋषिकेश, रानीपोखरी और टिहरी से लेकर दूर-दराज़ के गांवों तक लोग व्रत और पूजा-अर्चना कर रहे हैं। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि वे इस बार अपनी पूजा शिवजी से इस प्रार्थना के साथ अर्पित कर रहे हैं – कि उत्तराखंड पर आई आपदाओं का असर कम हो, पीड़ितों को संबल मिले और खोया हुआ जीवन फिर से पटरी पर लौटे।
सावन का आख़िरी सोमवार भले कैलेंडर में समाप्त हो रहा हो, लेकिन इस बार इसकी यादें आस्था और इंसानियत, दोनों के रंग में डूबी रहेंगी।







