पिथौरागढ़, उत्तराखंड: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में 7 साल की मासूम के साथ हुई दरिंदगी ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। गैंगरेप और हत्या जैसे जघन्य अपराध में मुख्य आरोपी अख्तर अली को मार्च 2016 में हल्द्वानी की एडीजे स्पेशल कोर्ट ने दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। लेकिन हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरोपी को बरी किए जाने के बाद पूरे जिले में गहरा आक्रोश फैल गया है। न्याय की उम्मीद लगाए बैठे परिजनों और आम नागरिकों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
20 नवंबर 2014 को पिथौरागढ़ की रहने वाली 7 साल की मासूम अपने परिवार के साथ हल्द्वानी के शीशमहल स्थित रामलीला मैदान में एक शादी समारोह में शामिल होने आई थी। समारोह के दौरान अचानक वह लापता हो गई। काफी तलाश के बाद 6 दिनों बाद उसका शव गौला नदी से बरामद हुआ। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने पूरे प्रदेश को सन्न कर दिया—मासूम के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी गई थी।
इस घटना के बाद पूरे उत्तराखंड में गुस्से की लहर दौड़ गई थी। लोग सड़कों पर उतर आए, विरोध प्रदर्शन हुए, और तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के काफिले पर भी हमला हुआ। पुलिस ने कई राज्यों में छापेमारी कर मुख्य आरोपी अख्तर अली को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर दो और आरोपियों—प्रेमपाल और जूनियर मसीह—को भी पकड़ा गया।
न्याय की उम्मीद टूटती हुई
मार्च 2016 में अदालत ने अख्तर अली को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। परंतु सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में बरी कर दिए जाने के बाद पीड़ित परिवार को गहरा धक्का लगा है। 11 वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे परिजनों का विश्वास डगमगाता नजर आ रहा है। जिले की जनता, मातृशक्ति, बच्चों और आम लोगों ने रामलीला मैदान में एकत्र होकर नारे लगाए — “दोषी कौन, मासूम को न्याय दो”।
लोगों का आरोप है कि कमजोर पैरवी और न्याय व्यवस्था में खामियों के चलते ऐसे अपराधियों को सजा नहीं मिल पा रही। अब जनता न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर उतर चुकी है।
अब पूरे क्षेत्र में न्याय की मांग तेज हो गई है। लोगों ने सरकार से मजबूत पैरवी, सख्त कानून और दोषियों को सजा दिलाने की मांग की है। पीड़ित परिवार न्याय की राह देख रहा है और समाज के हर वर्ग से समर्थन मिल रहा है।







