हरिद्वार में योगी आदित्यनाथ का संबोधन: संत परंपरा, रामराज्य और सुशासन पर दमदार संदेश

हरिद्वार में आयोजित समाधि मंदिर स्थापना समारोह के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संत परंपरा, गुरु–शिष्य संबंध और आध्यात्मिक विरासत की भूमिका पर विस्तार से विचार रखे। अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि भारतीय संत परंपरा ने केवल आध्यात्मिक जीवन को ही नहीं, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था को भी दिशा दी है। उन्होंने कहा कि संत परंपरा से प्रेरित होकर ही समाज और शासन में सकारात्मक बदलाव संभव होता है।

योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के पुराने हालात का जिक्र करते हुए वर्तमान परिस्थितियों की तुलना की। उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश में दंगों, अपराध और अराजकता की चर्चा होती थी, जबकि आज प्रदेश विकास, सुरक्षा और सुशासन के लिए जाना जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण ‘रामराज्य’ की अवधारणा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने माघ मेले का उल्लेख करते हुए बताया कि यह आयोजन अब केवल कल्पवासियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु इसमें भाग ले रहे हैं। उनके अनुसार, यह धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था की सफलता को भी दर्शाता है। उन्होंने कहा कि पहले जहां किसानों और व्यापारियों की सुरक्षा चिंता का विषय थी, वहीं अब स्थिति बदली है और लोग आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं।

अपने भाषण की शुरुआत करते हुए योगी आदित्यनाथ ने ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज को याद किया और भारत माता मंदिर की स्थापना के प्रसंग को साझा किया। उन्होंने बताया कि यह मंदिर राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता का प्रतीक है, जो भाषा, क्षेत्र और जाति की सीमाओं से ऊपर उठकर पूरे देश को जोड़ता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मंदिर के उद्घाटन के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और संघ प्रमुख बालासाहब देवरस दोनों की उपस्थिति एक ऐतिहासिक क्षण था।

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड को भारत की आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बताते हुए राज्य के विकास की सराहना की और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दोनों ही विकास और विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान उस समय उत्साह का माहौल बन गया जब मंच संचालक ने योगी आदित्यनाथ को ‘राष्ट्र का भविष्य’ कहकर संबोधित किया। इस पर उपस्थित संतों और श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। बाद में योगी के भाषण समाप्त होते ही कुछ लोग उठकर जाने लगे, जिससे थोड़ी असहज स्थिति बनी, लेकिन कार्यक्रम का संचालन जारी रखा गया और रक्षा मंत्री के संबोधन की शुरुआत की गई।

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