मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लगातार पांच साल का कार्यकाल पूरा होने की ओर बढ़ने के साथ ही उत्तराखंड की राजनीति में बयानबाज़ी तेज हो गई है। कांग्रेस ने धामी सरकार के करीब साढ़े नौ साल के भाजपा शासन को विकास के मोर्चे पर पूरी तरह विफल बताते हुए चुनावी वादों का हिसाब मांगा है।
वहीं भाजपा ने धामी सरकार के फैसलों को ऐतिहासिक बताते हुए विपक्ष के आरोपों को निराधार करार दिया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पांच साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार का रिपोर्ट कार्ड “नील बट्टे सन्नाटा” है। उनका कहना है कि भाजपा अपनी उपलब्धियां बताने के बजाय सिर्फ कांग्रेस को कोसने में लगी हुई है।
कांग्रेस ने सरकार से चुनावी वादों का हिसाब मांगते हुए कहा कि हर जिले में मेडिकल कॉलेज, बुजुर्गों को 5000 रुपये पेंशन और युवाओं को रोजगार देने जैसे वादे अब तक पूरे नहीं हुए। साथ ही अंकिता भंडारी हत्याकांड, नीट परीक्षा पेपर लीक और बढ़ती बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। कांग्रेस का दावा है कि जनता भाजपा की हकीकत समझ चुकी है और 2027 में इसका जवाब देगी।
वहीं भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। भाजपा विधायक विनोद चमोली ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने कई ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। उन्होंने समान नागरिक संहिता (यूसीसी), सख्त धर्मांतरण कानून, अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई और गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी का दर्जा जैसी उपलब्धियों को सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया।
भाजपा का कहना है कि विकास के मुद्दे पर विपक्ष सरकार के आसपास भी नहीं है और जनता धामी सरकार के कामकाज से संतुष्ट है। ऐसे में मुख्यमंत्री के पांच साल पूरे होने से पहले दोनों प्रमुख दलों के बीच सियासी जुबानी जंग और तेज होती दिखाई दे रही है।








